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जब गांगुली बैटिंग करते थे तो मैं कई बार ऑफ साइड में 5 फील्डर सेट करता था.. सौरव फिर भी उनके बीच से गैप निकालकर बाउंड्री मार देते थे
जब गांगुली बैटिंग करते थे तो मैं कई बार ऑफ साइड में 5 फील्डर सेट करता था.. सौरव फिर भी उनके बीच से गैप निकालकर बाउंड्री मार देते थे
जब गांगुली बैटिंग करते थे तो मैं कई बार ऑफ साइड में 5 फील्डर सेट करता था..
सौरव फिर भी उनके बीच से गैप निकालकर बाउंड्री मार देते थे
~ वसीम अकरम!
दादा कई मायनो में ग्रेट थे और रहेंगे।
फिक्सिंग विवाद के बाद नयी टीम खड़ी करनी हो
या फिरंगियों को स्लेजिंग का जवाब देना हो,
टीम इंडिया को लड़ना सीखाना हो या टीम के लिए नए हीरे तराशने हो…
दादा हमेशा 100 फीसदी खरे उतरे।

एक क्षेत्र में दादा धोनी से हमेशा आगे रहेंगे कि दादा ने सचिन की फिरकी का बेहतरीन इस्तेमाल किया…
पर धोनी ने सचिन से गेंदबाजी नहीं करवाई।
सचिन एक बेहतरीन पार्ट टाइम स्पिनर रहे है।
पर दादा की एक खूबी जो उन्हें सबसे अलग बनाती है वो है अपनी फेवरेट बेटिंग पोजिशन को छोड़ देना…
दादा ने अपना ओपनिंग स्लॉट विरेंद्र सहवाग के लिए छोड़ दिया।
ये वाकई कठिन फैसला होता है…पोंटिंग/स्टीव वा जैसे कप्तान भी ऐसे नहीं कर पाए कभी।
दादा को कॉमेंट्री करते देखना अच्छा न लगता..
वो हीरे तराशने में एक्सपर्ट है।
वीरू ज़हीर,भज्जी,धोनी, गंभीर जैसे खिलाडियों को दादा ने मौक़ा दिया व उभारा।
मेरे विचार से उन्हें आज उन्हें यंगस्टर की प्रतिभाओं को तराशना चाहिए जैसे द्रविड़ कर रहे।
एक सफलतम कप्तान और आक्रामक खिलाड़ी को जन्मदिन की ढेर सारी बधाई। 