ब्रेकिंग न्यूज़

“राहत इंदौरी” ने जिस दुर्भावना से ये लिखा था कि “सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े ही है”।

"राहत इंदौरी" ने जिस दुर्भावना से ये लिखा था कि "सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े ही है"।

“राहत इंदौरी” ने जिस दुर्भावना से ये लिखा था कि
“सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े ही है”।
उसका मुंहतोड, सटीक या यूं कहिए प्रखर उत्तर “बेचैन मधुपुरी” ने दिया है। आप भी उस उत्तर से उनके प्रेमी बन जाएँगे।

“खफा होते हैं तो हो जाने दो; घर के मेहमान थोड़े ही हैं,
सारे जहाँ भर से लताड़े जा चुके हैं; इनका मान थोड़े ही है ।
ये कान्हा और राम की धरती है; सजदा करना ही होगा,
मेरा वतन ये मेरी माँ है; लूट का सामान थोड़े ही है ।।

मैं जानता हूँ घर में बन चुके हैं सैकड़ों भेदी;
जो सिक्कों में बिक गए,
वो मेरा ईमान थोड़े ही है।

हमारे पुरखों ने सींचा है इस वतन को अपने लहू के कतरों से,
बहुत बांटा; मगर अब बस; ख़ैराते आम थोड़े ही है।

जो रहजन थे उन्हें हाकिम बना कर उम्रभर पूजा;
मगर अब हम भी इस सच्चाई से अनजान थोड़े ही हैं।

बहुत लूटा फिरंगी ने; कभी बाबर के पूतों ने,
ये मेरा घर है ; मुफ्त की सराय थोड़े ही है।

कुछ तो अपने भी शामिल हैं; वतन तोड़ने में,
अब ये कन्हैया औ रवीश मुसलमान थोड़े ही हैं।

यकीनन किरायेदार ही मालूम पड़ते हैं ये इस मुल्क में,
यूं बेमुरव्वत कोई जलाता है; अपना ही मकान थोड़ी है।

सभी का खून शामिल था यहाँ की मिट्टी में,
हम अनजान थोड़े हैं।
मगर जिनके अब्बा ले चुके पाकिस्तान;
अब उनका हिंदुस्तान

Gaurav Saxena

Related Articles

Back to top button